Makar Sankranti (14 January) celebrated with enthusiasm, first Kumbh bath in Haridwar, charity work and kite flying in many cities including Jaipur, Ahmedabad

उत्साह के साथ मनाई गई मकर संक्रांति (14 जनवरी) , हरिद्वार में पहला कुम्भ स्नान, दान कार्य और जयपुर, अहमदाबाद सहित अनेक शहरों में पतंगबाजी

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देश में गुरुवार, 14 जनवरी को धूमधाम के साथ मकर संक्रांति मनाई गई। हरिद्वार में कुम्भ का पहला स्नान हुआ। अनेक श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया और मिश्रित वस्तुओं जैसे खिचड़ी, तिल-गुड़ से बने व्यंजनों का दान कार्य किया। जहां गंगा नहीं हैं, वहां लोगों ने स्नान आदि के बाद सूर्य को अर्ध्य दिया और दान कार्य किया।

हरिद्वार में पहला 2021 का पहला कुम्भ स्नान
Satish Punia 14 January
सतीश पूनिया, राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष परिवार के साथ पतंगबाजी का लुत्फ उठाते हुए
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी पतंगबाजी की

जयपुर, अहमदाबाद सहित बहुत से शहरों में मकर संक्राति के मौके पर जमकर पतंगबाजी की गई। लोग सुबह साढ़े पांच बजे से ही सर्दी के बावजूद घरों की छतों पर पहुंच गए और पूरा दिन मौज-मस्ती में बिताया। कांग्रेस नेता सचिन पायलट, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी पतंगबाजी का लुत्फ उठाया और प्रदेश वासियों को सूर्य उत्तरायण आने की बधाई दी।

पतंग के कारण दो पक्षों में पथराव

Birds 14 January
पतंगबाजी के दौरान घायल पक्षियों का इलाज किया गया

यद्यपि तेज धार वाले और चाइनीज/देसी मांझे पर पाबंदी लगी हुई है, इसके बावजूद देसी तेजधार वाले मांझों का जमकर इस्तेमाल करने का प्रयास किया गया। पतंग उड़ाते हुए बहुत लोग और विशेषतौर पर बहुत से बच्चों को चोटों आईं और बहुत से पक्षी मांझे में उलझकर घायल हुए। उन्हें बचाने के लिए विशेष प्रयास भी किये गये।

जयपुर के नाहरगढ़ थाना क्षेत्र में तो पतंग लूट के चलते दो पक्षों के बीच पथराव हो गया। इसमें 2 महिलाओं सहित आधा दर्ज लोग घायल हो गए। पुलिस ने आधा दर्जन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उन्हें हिरासत में लिया गया है। सीसीटीवी फ़ुटेज के आधार पर बदमाशों को चिन्हित किया जा रहा है। फिलहाल मौके पर पुलिस का भारी जाब्ता तैनात किया गया है।

सीमित आतिशबाजी और कंडील की पतंगें

शाम को आतिशबाजी और कंडील की पतंगें

जयपुर में हवा बहुत धीमे चली और इस वजह पतंगबाज रुक-रुक कर पतंगों को उड़ाने की कोशिश में रहे। शाम तीन बजे के बाद हवा ठीक चली तो पतंगबाजों के लिए पतंगों को उड़ा पाना सहज हो सका। शाम होते-होते पिछली बार की अपेक्षा सीमित आतिशबाजी हुई और कंडील की पंतगें भी उड़ाई गईं।    

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