nagar nigam jayapur gretar mein rishvat maamalaah aaropiton rikording vaale kamare par lekar gayee eseebee( acb), 2 julaee ko kort mein pesh honge, maamala darj hone par rss ka spashteekaran, maarapeet maamale mein chaaron paarshadon ke viruddh giraphtaaree vaarant, nilambit mahaapaur saumya ko 15 din ka samay

नगर निगम जयपुर ग्रेटर में रिश्वत मामलाः आरोपितों रिकॉर्डिंग वाले कमरे पर लेकर गयी एसीबी( ACB), 2 जुलाई को कोर्ट में पेश होंगे, मामला दर्ज होने पर RSS का स्पष्टीकरण, मारपीट मामले में चारों पार्षदों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट, निलम्बित महापौर सौम्या को 15 दिन का समय

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जयपुर शहर में ठेके पर सफाई का काम करने वाली कंपनी को 276 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर 20 करोड़ रुपये की रिश्वत के लेन-देन के संबंध में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( ACB)  गिरफ्तार राजाराम गुर्जर और बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि ओमकार सप्रे से पूछताछ में लगी है। जल्द ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( RSS) के प्रचारक निंबाराम और बीवीजी कंपनी एक अन्य प्रतिनिधि संदीप चौधरी से भी पूछताछ हो सकती है। इसके अलावा नगर निगम आयुक्त के साथ मारपीट प्रकरण में चार पार्षदों के विरुद्ध अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किये हैं और निलम्बित महापौर सौम्या गुर्जर को 15 दिन का समय दिया है।

इसी सिलसिले में पता चला है कि रिश्वत के लेन-देन की बातचीत का वायरल वीडियो जयपुर में सहकार मार्ग स्थित सेवा सदन में तैयार किया गया था।एसीबी रिमांड पर लिये गये दोनों गिरफ्तार आरोपियों को लेकर गुरुवार, 1 जुलाई को सेवा सदन पहुंची और जिस कमरे में बातचीत हुई, उसकी पहचान की। अब 2 जुलाई को दोनों आरोपितों को कोर्ट में पेश किया जायेगा।

उल्लेखनीय है कि सेवा सदन के जिस कमरे में 20 अप्रेल को तत्कालीन जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम गुर्जर, बीवीजीकी कंपनी के प्रतिनिधि ओमकार सप्रे, संदीप चौधरी की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम से मुलाकात हुई थी। इसी कमरे में बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि ने बातचीत का वीडियो रिकॉर्ड किया था।  फिलहाल इस मामले में निंबाराम और संदीप चौधरी से पूछताछ नहीं हुई है। समझा जा रहा है कि संदीप जल्द ही एसीबी के सामने पेश होगा। वीडियो बनाकर वायरल करने में उसकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में संदीप से पूछताछ के बाद और भी खुलासे होने की संभावना है।

आरएसएस का स्पष्टीकरण

उधर, आरएसएस की ओर से भी स्पष्टीकरण आया है कि बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि आरएसएस के उ.प. क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम के पास उदयपुर स्थित प्रताप गौरव केंद्र के लिए (कॉर्पोरेट सोशल रेस्पान्सिबिलिटी ) सीएसआर फंड से सहायता का प्रस्ताव लेकर आये थे। निंबाराम की ओर से कंपनी के प्रतिनिधियों से कहा गया था कि वे प्रताप गौरव केंद्र का दौरा कर आवश्यक्तानुसार सहयोग करें लेकिन ये प्रतिनिधि निर्धारित तिथि पर पहुंचे ही नहीं, तो ऐसे में केंद्र के लिए धन लेने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। संघ की ओर से कहा गया है कि 20 अप्रेल के वीडियो में निंबाराम दिख रहे हैं किंतु कंपनियों के प्रतिनिधियों से उनकी भेंट सामान्य शिष्टाचार के नाते की गयी थी। इसके बावजूद उनका नाम का उल्लेख राजनीतिक कारणों से अलग-अलग वीडियो रिकॉर्डिंग को जोड़कर किया जा रहा है। यह निंदनीय प्रयास है। यद्यपि देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते निंबाराम सारे मामले की जांच मे सहयोग को तैयार हैं।

एसीबी के डीजी बीएल सोनी ने बताया कि बीवीजी कंपनी को धमकाने के अंदाज में रिश्वत मांगने के आरोप में राजाराम गुर्जर को और रिश्वत की भारी रकम का प्रस्ताव देने के आरोप में बीवीजी कंपनी के ओमप्रकाश सप्रे को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा वायरल वीडियो में रिश्वत का ऑफर करने वाले बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि संदीप चौधरी और रिश्वत की सौदेबाजी में सहयोगात्मक भूमिका निभाने वाले निंबाराम व अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधित) अधिनियम 2018 और 120 बी आईपीसी में मुकदमा दर्ज किया गया है।

चारों पार्षदों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, सौम्या को 15 दिन का समय

उधर, गुरुवार 1 जुलाई को नगर निगम, जयपुर ग्रेटर के कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह की शिकायत कि 4 जून को उनके साथ मारपीट की गयी थी, पर ज्योति नगर थाना पुलिस की ओर से कोर्ट में चालान पेश किया गया। इस चालान के आधार पर निचली अदालत ने संज्ञान लेते हुए चारों पार्षदों पारस जैन, अजय सिंह, शंकर शर्मा और रामकिशोर प्रजापत के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इसके अलावा निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर को सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश होने के संबंध में 15 दिन का समय दिया है। उन्हें बच्चे के स्वास्थ्य का हवाला देने पर यह समय दिया गया। उल्लेखनीय है कि  दो दिन पहले कोर्ट ने पेश किया चालान को यह कहते हुए लौटा दिया था कि जांच अधिकारी ने चार्जशीट पेश करने से पहले आरोपियों को न तो इसकी सूचना दी और न ही सूचना पर हस्ताक्षर कराये।

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