Ashok gehlot

सियासी रण में विपक्ष को किया बेदम

जयपुर राजनीति

गहलोत सरकार ने हासिल किया विश्वास मत

विधानसभा 21 अगस्त तक स्थगित

जयपुर। प्रदेश में 35 दिनों तक चला सियासी रण शुक्रवार को समाप्त हो गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस रण में विजयी होकर अपना दम दिखा दिया और विपक्ष को पूरी तरह से बेदम कर दिया।

गहलोत सरकार ने विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया। विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में 123 और विपक्ष के खेमे में 75 वोट पड़े। विपक्ष ने विश्वास मत पर बहस के बाद मत विभाजन की मांग नहीं की। इसलिए सरकार ने ध्वनिमत से विश्वास मत जीता।

कांग्रेस विधायक विश्वास मत देने जाते हुए

विधानसभा में विश्वास मत पर बहस का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि यह आपकी पार्टी और आपके हाईकमान का सरकार गिराने का षडय़ंत्र था। पूरे देश में लोकतंत्र की हत्या का नंगा नाच चल रहा है। देश में लोकतंत्र खतरे में है, केवल 2 लोग राज कर रहे हैं। बीजेपी के लोग बगुला भक्त बन रहे हैं।

राजभवन से फाइल नहीं लौटी, गुस्सा आना लाजमी था

गहलोत ने कहा कि गवर्नर्स पर गृहमंत्री का दबाव होता है, लेकिन हमारे गवर्नर भले आदमी है। अब तक विधानसभा सत्र बुलाने की फाइल तत्काल मंजूरी के साथ आ जाती थी, इस बार सत्र बुलाने की फाइल राजभवन से नहीं आई, तो हमने एप्रोच किया। गुस्सा आना स्वाभाविक था, मैने यह नहीं कहा कि जनता राजभवन का घेराव करेगी, तो हम कुछ नहीं करेंगे, इसे गलत रूप से प्रचारित किया गया था।

हमने किसी का फोन टेप नहीं किया

चर्चा के दौरान गहलोत ने कहा कि राजस्थान में फोन टेपिंग की परंपरा नहीं रही। क्या ईडी, इनकम टैक्स का दुरुपयोग नहीं हो रहा? सरकार को टॉपल करने का प्रयास किया गया। इसे लेकर एसओजी ने मामला दर्ज किया था।

हमने किसी का फोन टेप नहीं किया और एसओजी ने केवल गवाह के तौर पर सीएम, डिप्टी सीएम सहित कई विधायकों को धारा 160 के तहत नोटिस जारी किए थे, किसी को भी आरोपी के तौर पर नोटिस जारी नहीं किया गया।नेता प्रतिपक्ष को भी कुछ मुद्दों पर गुमराह रखा गया होगा। जब हम खुद ईडी, सीबीआई पर आरोप लगाते हैं तो क्या खुद एसओजी-एसीबी की दुरुपयोग करेंगे?

ये बता काफिला क्यों लुटा

गहलोत ने कहा कि राजनीति का नैतिक पतन हो रहा है। देश में आर्थिक स्थिति, कोरोना को लेकर भयावह हालत है और हमारी सरकार को गिराने का प्रयास हो रहा था, लेकिन उसमें बीजेपी को तगड़ा झटका लगा। शायराना अंदाज में गहलोत ने कहा कि तू इधर-उधर की ना बात कर, ये बता काफिला क्यों लुटा, काफिलों का रहबर ही कातिल से मिला हुआ था।

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