Tender proposals are being prepared for door-to-door garbage collection in 8 zones

नगर निगम ग्रेटर की राजनीतिक पहुंच और पैसों की चमक के तिलिस्म को तोड़ने की तैयारी, 8 जोनों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए निविदा प्रस्ताव हो रहे तैयार

जयपुर

जयपुर। जयपुर के लिए नासूर बन चुकी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण कंपनी बीवीजी के राजनीतिक पहुंच और पैसों की चमक के तिलिस्म को तोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम जयपुर ग्रेटर ने बीवीजी कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए आठों जोनों में अलग-अलग निविदा प्रस्ताव तैयार कराने शुरू कर दिए हैं।

अभी तक पूरे शहर में डोर-टू-डोर के लिए सिर्फ बीवीजी कंपनी को काम दिया गया था, लेकिन अब ग्रेटर के आठ जोनों में डोर-टू-डोर के लिए अलग-अलग टेंडर कराए जाएंगे। जानकारों का कहना है कि यदि ग्रेटर यह टेंडर कराने में कामयाब होता है तो किसी एक कंपनी के हाथ में यह काम नहीं जा पाएगा। कचरा संग्रहण की प्रभावी मॉनिटरिंग हो पाएगी। टेंडर में प्रतिस्पर्धा होने पर कचरा संग्रहण की दरें कम हो जाएंगी।

जानकारी सामने आई है कि महापौर सौम्या गुर्जर के निर्देशों पर ग्रेटर के अधिशाषी अभियंता (प्रोजेक्ट) मनोज कुमार शर्मा आठों जोनों में अलग-अलग टेंडर कराने की तैयारियों में जुटे हैं। टेंडर डाक्यूमेंट तैयार होने के बाद इन्हें मंजूरी के लिए महापौर के समक्ष पेश किया जाएगा और मंजूरी मिलने के बाद सभी जोनों में टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

जानकारों का कहना है कि बीवीजी कंपनी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। लगातार शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद कंपनी के काम में कोई सुधार नहीं आ पा रहा है। डोर-टू-डोर के बाजाए कंपनी ओपन डिपो से कचरा उठा रही है। तीन दिन से चल रही कंपनी के कर्मचारियों की हड़ताल गुरुवार को ही खत्म हुई है। कंपनी ने जयपुर में अपने अधिकारियों की कटौती कर रखी है और अभी तक जिन 42 वार्डों में कंपनी खुद काम कर रही थी, उन्हें भी सबलेट करने की तैयारियां चल रही है।

निगम सूत्रों का कहना है कि बीवीजी कंपनी चार सालों से राजनीतिक पहुंच के दम और पैसों की चमक के जरिए मनमानी से काम कर रही है, उसका कोई भी काम ऐसा नहीं है, जो अनुबंध की शर्तों को पूरा करता हो। चंद पैसों की चमक में अपना ईमान बेच चुके शहर के राजनेताओं और निगम अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही यह कंपनी अभी तक काम करने में कामयाब हो पाई है। सफाई व्यवस्था से पूरा शहर परेशान है।

पार्षद सफाई के मामले में जनता को जवाब नहीं दे पा रहे थे। ऐसे में भाजपा हो या कांग्रेस सभी पार्षदों ने साधारण सभा की बैठक में इस कंपनी की खिलाफत की और इसे बाहर का रास्ता दिखाने की मांग की थी।

पूर्व पार्षद अनिल शर्मा का कहना है कि बीवीजी कंपनी को दिया गया डोर-टू-डोर का काम निगम के इतिहास में सबसे बड़े घोटाले के रूप में दर्ज होगा। कंपनी के खिलाफ एसीबी में शिकायत दर्ज है। अब यदि ग्रेटर निगम इस कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी कर रहा है तो यह खबर बड़ा सुकून देने वाली है। महापौर सौम्या गुर्जर का यह साहसिक कदम माना जाएगा।

इससे पूर्व पिछले बोर्ड में भी महापौर विष्णु लाटा ने इस कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए सभी जोनों में अलग-अलग टेंडर कराने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय तत्कालीन आयुक्त वीपी सिंह ने इस काम में रोड़े अटका दिए थे, वह नहीं चाहते थे कि कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

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