There is little hope of finding a solution to the factionalism of Rajasthan BJP in the national executive, the central leadership is in the mood to hang the case

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राजस्थान भाजपा की गुटबाजी का हल निकलने की उम्मीद कम, केंद्रीय नेतृत्व मामले को लटकाने के मूड में

जयपुर

जयपुर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा की ओर से आहूत राष्ट्रीय कार्यकारिणी की 21 फरवरी को दिल्ली में आयोजित बैठक में भी राजस्थान भाजपा की गुटबाजी का हल निकलने पर संक्षय बना हुआ है। कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व अभी राजस्थान के मामले में कुछ करने का इच्छुक नहीं दिखाई दे रहा है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस तरह की खबरें चल रही है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रदेश भाजपा में चल रही गुटबाजी का कुछ हल निकल सकता है, इसी लिए वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया को दिल्ली बुलाया गया है। जबकि हकीकत यह है कि राजे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और इस नाते वह बैठक में शामिल होंगी, वहीं बैठक में सभी प्रदेशों के प्रदेशाध्यक्ष भी शामिल होते हैं, ऐसे में पूनिया भी वहां पहुंचेंगे।

जानकारी के अनुसार कार्यकारिणी बैठक के दौरान प्रदेश में चल रही गुटबाजी को लेकर राजे और पूनिया बड़े नेताओं से भी मिल सकते हैं। नड्ढा ने यह बैठक संगठन को मजबूत करने के लिए बुलाई है, ऐसे में बैठक में सभी राज्यों के साथ-साथ राजस्थान की ताजा राजनीतिक स्थितियों और संगठन पर चर्चा होगी जरूर, लेकिन अभी इस पर संक्षय है कि केंद्रीय नेतृत्व राजस्थान को लेकर कुछ दिशा-निर्देश प्रदान करे। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि राजस्थान में अभी चुनाव तीन साल दूर है और केंद्रीय नेतृत्व को अभी राजस्थान को लेकर कोई जल्दी नहीं है। राजस्थान का नंबर बंगाल और उत्तर प्रदेश चुनावों के बाद ही आ पाएगा।

कहा जा रहा है कि राजस्थान के पड़ौसी राज्य उत्तर प्रदेश में इसी वर्ष चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व नहीं चाहता है कि राजस्थान में किसी तरह का दबाव बढ़ाया जाए। यदि इस समय राजस्थान में कुछ सख्ती दिखाई जाती है और गुटबाजी घटने के बजाए बढ़ती है तो इसका असर उत्तर प्रदेश पर पड़ सकता है। दिखावे के लिए संगठन में छोटे-मोटे बदलाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन बड़े बदलाव की अभी संभावना नहीं है। सूत्र कह रहे हैं कि राजस्थान भाजपा की गुटबाजी कई दशकों से चल रही है और नासूर बन गई है। इसलिए इसका पुख्ता इलाज इस बार किया जाएगा, लेकिन वह उत्तर प्रदेश चुनावों के बाद ही संभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *