mayor and officails will visit the places where cleanliness staff collect for attendance

दो महापौर और सरकार नहीं सुधार पाए, क्या नई महापौर दिखा पाएंगी बीवीजी को बाहर का रास्ता

जयपुर

ग्रेटर महापौर ने डोर-टू-डोर कंपनी बीवीजी के कार्यों की समीक्षा के लिए बुलाई बैठक

जयपुर। हर महीने डोर-टू-डोर सफाई व्यवस्था पर करोड़ों रुपए फूंकने के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था पिछले चार सालों में पटरी पर नहीं आ पाई है। डोर-टू-डोर सफाई कर रही बीवीजी कंपनी शहर के लिए नासूर बन चुकी है। दो महापौर और दो वर्ष से राज्य सरकार इस कंपनी का बाल भी बांका नहीं कर पाई है, ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या नई महापौर इस कंपनी को जयपुर से बाहर का रास्ता दिखा पाएंगी? या फिर यह कंपनी ऐसे ही शहरी सरकार की छाती पर मूंग दलती रहेगी।

निगम सूत्रों के अनुसार नगर निगम ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर ने मंगलवार को शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर बैठक बुलाई है, बैठक में सिर्फ बीवीजी के कार्यकलापों पर भी चर्चा होगी। इसमें ग्रेटर के आयुक्त, विभिन्न जोनों के उपायुक्तों, अधिशाषी अभियंता, प्रोजेक्ट, बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधियों और सफाई से जुड़े अन्य अधिकारियों को तलब किया गया है।

दो महापौर और सरकार भी नहीं हटा पाए

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में अशोक लाहोटी के कार्यकाल के दौरान बीवीजी कंपनी ने शहर में डोर-टू-डोर का काम शुरू किया था। शुरूआती कुछ महीनों में ही साबित हो गया कि यह कंपनी पूरे शहर में डोर-टू-डोर का काम नहीं कर पाएगी, लेकिन कंपनी के प्रतिनिधियों ने शहरी सरकार में जमकर भ्रष्टाचार फैलाया और सेटिंगबाजी करके आज तक काम कर रही है। लाहोटी के बाद विष्णु लाटा कांग्रेस के समर्थन से महापौर बने, लेकिन सरकार में होते हुए भी वह इस कंपनी को बाहर का रास्ता नहीं दिखा पाए। लाटा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार भी इस कंपनी का काम बंद नहीं करवा सकी।

गे्रटर और हेरिटेज की दोनों महापौरों ने भी कंपनी के कार्यों पर सवाल उठाए हैं और कंपनी का दूसरा विकल्प देखने की बात कही है, लेकिन क्या ऐसा हो पाएगा? ग्रेटर के हाल तो और भी खराब हैं। भाजपा बोर्ड होने के कारण अधिकारी अभी से ही सहयोग नहीं कर रहे हैं। महापौर गौशाला के दौरे पर पहुंची और सूचना होने के बाद अधिकारी गौशाला नहीं पहुंचे। मालवीय नगर में कचरे के ढ़ेर देखकर महापौर की ओर से उपायुक्त को कई बार वायरलेस पर मैसेज भेजे गए, लेकिन उपायुक्त नहीं पहुंचे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि नई बनी दोनों महापौर क्या इस कंपनी को शहर से बाहर कर पाएंगी?

एसीबी में पहुंच चुका है मामला

निगम के पूर्व पार्षद अनिल शर्मा ने बीवीजी कंपनी और अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर एसीबी में परिवाद दर्ज करवा रखा है। शर्मा का कहना है कि कंपनी आज तक अनुबंध की शर्तों के अनुसार काम नहीं कर पाई है। न कंपनी का जयपुर में कोई कार्यालय है और न ही मैनेजमेंट है। बोर्ड की मीटिंगों में भी कई पार्षद कंपनी की ओर से किए जा रहे भ्रष्टाचार के मामले उठा चुके हैं। इसके बावजूद आज तक इस कंपनी के खिलाफ निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की।

कंपनी को बाहर करना ही अंतिम उपाय

शर्मा का कहना है कि बैठकें करने से जयपुर की सफाई व्यवस्था और इस कंपनी की कार्यप्रणाली सुधरने वाली नहीं है। जब तक इस कंपनी को बाहर नहीं किया जाता है, तब तक जयपुर की जनता का भला नहीं होने वाला है। कंपनी को उसके तीन पैकेजों में 150 से अधिक नोटिस दिए जा चुके हैं। अब नगर निगम, अधिकारी कितने और नोटिस देने का इंतजार कर रहे हैं। महापौर के पास भी इस कंपनी का काम बंद कराने के अलावा कोई उपाय नहीं बचता है।

नगर निगम हो जाएगा दिवालिया

यदि इस कंपनी का काम बंद नहीं कराया जाएगा तो निगम दिवालिया हो जाएगा। जो कचरा उठाने का काम नगर निगम 550 रुपए प्रतिटन कर सकता है, वही काम अधिकारी इस कंपनी से 1800 रुपए प्रतिटन में करवा रहा है। इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल है। इस कंपनी को काम के एवज में शहर के लोगों से निर्धारित शुल्क वसूलना था। कंपनी काम नहीं कर पा रही है और इसको भुगतान निगम के अन्य मदों से किया जा रहा है। इस दोहरी मार से निगम का दिवालिया होना तय है। कंपनी की ओर से डीपीआर के हिसाब से इन्वेस्टमेंट भी नहीं किया गया है। अब सफाई को लेकर होने वाली बैठक में तस्वीर साफ हो जाएगी कि इस कंपनी को काम बंद होता है या यह निगम के उच्चाधिकारियों की मेहरबानी से शहर के नासूर ही बनी रहती है।

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