Aam Aadmi Party eye Rajasthan on the pretext of farmers' movement

किसान आंदोलन (Farmers movement) के बहाने आम आदमी पार्टी (AAP) की निगाहें राजस्थान (Rajasthan)पर

जयपुर

जल्द एमएलए और एमपी बनने वाले नेता पार्टी में शामिल नहीं हों-जागीरदार

राजस्थान में दोनों प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और किसान आंदोलन के बहाने आम आदमी पार्टी (AAP) अब राजस्थान (Rajasthan) में दस्तक देने की तैयारी कर रही है । राजस्थान में पैर जमाने की रणनीति के तहत ही पार्टी अब दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन (farmers movement) को समर्थन देने के बाद सबसे पहले पंजाब की सीमा से लगते राजस्थान के गंगानगर, हनुमानगढ और बीकानेर के किसानों को लुभाने की तैयारी कर रही है।

पार्टी की ओर से 26 सितंबर को गंगानगर में किसान न्याय सभा आयोजित की जाएगी। इस सभा को आम आदमी पार्टी के सांसद और राजस्थान आप प्रभारी संजय सिंह संबोधित करेंगे। शनिवार को आम आदमी के राज्य सह प्रभारी खेमचंद जागीरदार ने पत्रकारों को बताया कि किसानों के हितों को लेकर कांग्रेस और भाजपा का चेहरा सबसे सामने आ गया है। लेकिन आम आदमी पार्टी को किसानों की चिंता है।

आगामी चुनाव में पंजाब में हमारी सरकार बनना तय है और अब हमारी निगाह राजस्थान पर है। इसलिए हम जमीनी स्तर पर किसानों के साथ खडे होकर राज्य में अपनी पैठ बना रहे हैं। इसलिए गंगानगर में पहली सभा का आयोजन कर रहे हैं।

जागीरदार ने कहा कि बिजली की दरों को लेकर राजस्थान में कांग्रेस सरकार की मनमानी नहीं रुक रही है। दिल्ली राजस्थान से बिजली खरीद रहा है लेकिन यहां कि उपभोक्ताओं को महंगी बिजली दी जा रही है। बिजली की दरों, लॉक डाउन अवधि के बिजली और पानी के बिलों की माफी को लेकर आंदोलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पार्टी जात-पात में भरोसा नहीं करती हैं। राजस्थान में पार्टी के अध्यक्ष के लिए नाम भेज दिए हैं और जल्द नाम का ऐलान होगा। इस दौरान शनिवार को आप के कुनबे में बढोतरी हुई। प्रदेश के कर्मचारी नेता गिरिराज किशोर शर्मा पार्टी में शामिल हो गए हैं।

जागीरदार से पूछा गया कि आम आदमी पार्टी से नेता जुडते तो हैं लेकिन जल्द ही पार्टी को छोड देते हैंं। इस पर उन्होने कहा कि कुछ लोग जल्द से जल्द एमएलए और एमपी बनने की महत्वांकाक्षा लेकर पार्टी में शामिल हो जाते हैं। लेकिन, जब उनको पता चलता है कि पार्टी में मेहनत से ही कुछ मिलता है तो फिर पार्टी छोड कर चले जाते हैं। पाटियों में नेताओं के आने और जाने का सिलसिला चलता रहता है।

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