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मुख्यमंत्री के निर्देशों की पालना के लिए संवेदकों के कंधों का सहारा ले रहा एडमा

जयपुर

जयपुर। कोरोना महामारी के कारण आर्थिक मंदी के दौर में ठेकेदारों (संवेदकों) को राहत देने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मानवीय आधार पर संवेदकों अंतर राशि वसूलने के साथ-साथ कई अन्य मामलों में छूट प्रदान की थी। पुरातत्व विभाग के साथ उसकी कार्यकारी एजेंसी आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एडमा) के निर्लज्ज अधिकारियों ने मानवीयता को ताक में रखकर निर्देशों को नहीं माना और जबरन वसूली की। जब मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा पुरातत्व विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया तो एडमा के अधिकारियों ने खुद कार्रवाई करने के बजाय संवेदकों के कंधों पर बंदूक रख दी।

हुआ यूं कि क्लियर न्यूज डॉट लाइव ने कोरोना के कारण आई आर्थिक मंदी में परेशान संवेदकों का मामला उठाया था। खबर पर प्रसंज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने पुरातत्व विभाग से स्पष्टीकरण मांग लिया। इसकी सूचना एडमा में पहुंची तो अधिकारी अंतर राशि के प्रावधान को हटाने में जुट गए लेकिन यहां उनकी बेशर्मी सामने आ गई।

नाम नहीं छापने की शर्त पर एडमा के एक अधिकारी ने बताया कि निर्देशों के बाद एडमा को तुरंत यह प्रावधान हटा देना चाहिए लेकिन निर्देशों को मानने के बजाय अभी तक संवेदकों को परेशान किया जा रहा है और उनसे जबरन वसूली की गई। अब स्पष्टीकरण मांगने के बाद एडमा के उच्चाधिकारियों ने खुद निर्णय लेने के बजा संवेदकों के कंधों का सहारा लिया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संवेदक लिखित में अंतर राशि हटाने के ज्ञापन दे चुके हैं। उच्चाधिकारी इन्हीं ज्ञापनों को आधार बनाकर अंतर राशि को हटाने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। उच्चाधिकारी पुरातत्व विभाग की ओर निगाह रखे हैं कि अगर वहां प्रावधान हट जाता है तो फिर एडमा भी यह प्रावधान हटा देगा, नहीं तो संवेदकों से अनुचित तरीके से यह राशि वसूली जारी रहेगी।

सूत्रों का कहना है कि एडमा संवेदकों की कब्रगाह बन गया है। प्रतिनियुक्ति पर आये अधिकारी संवेदकों का खून चूसने में लगे हैं और उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है। अधिकारियों और संवेदकों में जूतमपैजार की स्थितियां आ चुकी है। अधिकांश ठेकेदार एडमा से काम छोड़कर दूसरे विभागों में जा चुके हैं।

इस पूरे मामले में एडमा की कार्यकारी निदेशक दीप्ति कच्छावा, कार्यकारी निदेशक वित्त नरेंद्र सिंह और कार्यकारी निदेशक कार्य को जिम्मेदार माना जा रहा है। इन तीनों की कमेटी बनी हुई है, जो एडमा में होने वाले सभी कार्यों का संचालन करती है। सूत्र बताते हैं कि इस कमेटी के पास अंतर राशि हटाने का अधिकार था। कमेटी अंतर राशि को हटाने का प्रस्ताव तैयार करके शासन सचिव से अनुमोदित करा के इस प्रावधान को खत्म कर सकती थी लेकिन ये अधिकारी 8 जुलाई 2020 को जारी मुख्यमंत्री के निर्देशों की अभी तक पालना नहीं करा पाए।

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