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देश में केवल 10 जगह है जिनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा, राजस्थान में भी जल्द शुरू होगी, इससे स्ट्रेन का पता लगाकर किया जा सकेगा उपचार: चिकित्सा मंत्री

जयपुर ताज़ा समाचार

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि वायरस के स्ट्रेन का पता लगाने के लिए जिनोम सिक्वेसिंग की जरूरत होती है। फिलहाल यह सुविधा केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यह तय किया है कि जिनोम सिक्वेसिंग की सुविधा को प्रदेश की एसएमएस मेडिकल कॉलेज में प्रारंभ किया जाए। इसके लिए विभाग के अधिकारियों के जरूरी तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई हैं।

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि जिनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा देश भर में केवल 10 जगह है, हर राज्य से वहां सैंपल भेजे जाते हैं। प्रदेश सरकार ने स्ट्रेन का पता लगाने के लिए कई दिनों पहले सैंपल भेजा था। हाल ही पता लगा है कि राजस्थान में ब्रिटेन का स्ट्रेन है। उन्होंने कहा प्रदेश में जिनोम सिक्वेंसिंग के शुरू होने से पता चल सकेगा कि वायरस किस स्ट्रेन का है। चिकित्सक स्ट्रेन के अनुसार ही इलाज कर सकेंगे।

तीसरी-चौथी लहर से निपटने के लिए शुरू की तैयारियां

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों और चिकित्सकों द्वारा देश भर में तीसरी और चौथी लहर  बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक होने की आशंका जताई जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग ने इसके लिए अभी से तैयारी करना शुरू कर दिया है। सरकार शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों योजनाओं पर विस्तार से काम कर रही है। राज्य के सभी बच्चों के अस्पतालों में स्थित नीकू, पीकू, एसएनसीयू तथा मातृ एवं शिशु चिकित्सालयों में सेंट्रलाइज ऑक्सीजन सिस्टम विकसित करने, ऑक्सीजन जेनेरेशन प्लांट लगाने की योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है।

घर-घर जाकर बांटी जा रही दवा, लिए जा रहे हैं सैंपल

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पिछली लहर में बुजुर्ग और शहरी क्षेत्रों के लोग कोरोना से ज्यादा संक्रमित हो रहे थे लेकिन इस बार कोरोना गांवों और युवाओं तक भी पहुंच गया है। अब तक 7 लाख आईएलआई (वायरस के लक्षण वाले) लोगों को चिन्हित किया है। सरकार कोरोना के नियंत्रण में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। विभाग द्वारा गांवों में टीमें बनाकर घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है, जरूरी दवाइयों की किट बांटी जा रही हैं। आईएलआई केसेज, सिंप्टोमेटिक केसेज को चिन्हित किया जा रहा है।

एंटीजन टेस्ट से मिल सकेगी 15-20 मिनट में रिपोर्ट

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब तक आरटीपीसीआर टेस्ट ही किए जा रहे हैं। प्रदेश की 68 जगहों पर 1 लाख 45 हजार टेस्ट प्रतिदिन करने की क्षमता विकसित कर और प्रतिदिन 99 हजार टेस्ट तक किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में खांसी, जुकाम, बुखार के लक्षण वाले केसेज ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे में उनकी तुरंत जांच के लिए राज्य सरकार ने एंटीजन टेस्ट करने को फैसला लिया है।

उन्होंने कहा कि जहां आटीपीसीआर टेस्ट की विश्वसनीयता 70 फीसद है तो एंटीजन टेस्ट की विश्वसनीयता 40 प्रतिशत ही है लेकिन एंटीजन से पॉजिटिव केसेज की पता 15 से 20 मिनट में ही चल जाता है। उन्होंने कहा कि नेगेटिव लेकिन लक्षण वाले लोगों के सैंपल का आरटीपीसीआर किया जा सकेगा। सरकार का ध्यान ज्यादा से ज्यादा टेस्ट कर फैलते संक्रमण को रोकने पर है।

विलेज कमेटियां हुई फिर से एक्टिव

डॉ. शर्मा ने कहा कि पिछले दौर में बनी विलेज कमेटियों ने पहली लहर में बेहतरीन काम किया था। अनुशासन बनाकर उन पर निगरानी के साथ अच्छा काम किया था। गांवो में बाहर से आने-जाने वालों पर निगरानी रखने की बात हो। गांवो में सरकारी स्कूल या भवन को सरकारी क्वारंटीन सुविधा विकसित की थी। वही काम अब फिर से किया जा रहा है।

सभी सीएचसी में लगेंगे ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट, 50 बेड से होगा उपचार

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कोरोना को हराने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। हाल ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के चिकित्सा विभाग के 249 ब्लॉकों में स्थित सीएचसी को सुदृढ़ करने के निर्देश मिले हैं। उन्होंने कहा कि सभी सीएचसी में ऑक्सीजन जनरेशन के प्लांट लगाने, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर पहुंचाने और रेमडेसिविर जैसी दवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी सीएचसी में 50 बेडों से मरीजों का उपचार किया जा सकेगा ताकि जिला अस्पताल और राजधानी के अस्पतालों का प्रेशर कम हो सके। उन्होंने कहा कि सीएचसी की संख्या बढ़ानी भी पड़ी तो 350 तक बढ़ाई जा सकती है।

जीवन को दें प्राथकिमता, प्रोटोकॉल की करें कड़ाई से पालना

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में मजबूरी में लॉकडाउन लगाना पड़ा है। यदि हम संक्रमण की चेन को तोड़ना चाहते हैं तो बेवजह घर से बाहर ना निकलें। मास्क जरूर लगाएं। दो गज की दूरी रखें, बार-बार हाथ धोएं और सरकार द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि सामाजिक समारोहों से परहेज करें। जीवन रहेगा तो शादी-समारोह सब हो सकेंगे। जिंदगी को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर लॉकडाउन का पालन करें और घरों में रहें।

जनप्रतिनिधि आगे आएं, आमजन को कोरोना से बचाने की है चुनौती

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी प्रधान, उपप्रधान, जिला प्रमुख, उप प्रमुख, सरपंच, उपसरपंच, वार्ड मेंबर सहित सभी पंचायतीराज संस्थाओं के चुने हुए प्रतिनिधियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर विलेज कमेटियों को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देश दिए और गांवों में कोविड के एप्रोप्रिएट बिहेवियर और अनुशासन की पालना सुनिश्चित करने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों शहरों के मेयर, सभापति, उपसभापति, चेयरमैन, वाइस चेयरमेन, पार्षद सबको आगे आना होगा। सभी प्रतिनिधियों के सामने आमजन को बचाने की चुनौती है। सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है लेकिन 8 करोड़ की आबादी में इसी गति से संक्रमण फैलता रहा तो सरकार कितने भी संसाधन बढ़ा दे पूर्ति नहीं की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि हम अनुशासन में रहेंगे और कोविड गाइडलाइन की पालना करेंगे तो निश्चित रूप से यह संक्रमण की चेन टूटेगी। उन्होंने कहा कि पहले दौर में पूरे अनुशासन के साथ कोरोना को हराया है, दूसरे दौर में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कोरोना को मात देंगे।

60 से अधिक बेड वाले अस्पतालों के 50 फीसदी बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा जरूरी

स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रघु शर्मा ने बताया कि राज्य के अस्पतालों के लिए सरकार सभी संभव उपायों के जरिए ऑक्सीजन की व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी कोविड डेडीकेटेड सेंटर्स के अतिरिक्त जिन निजी अस्पतालों में 60 या उससे अधिक बेड्स है, वहां के 50 प्रतिशत बेड्स पर ऑक्सीजन की व्यवस्था होना जरूरी है।

डॉक्टर शर्मा ने कहा कि ऐसे  निजी चिकित्सालयों में सेंट्रलाइज ऑक्सीजन पाइपलाइन की स्थापना हो और कम से कम 50 प्रतिशत बेड्स इस सिस्टम से जुड़े हो। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम के जरिए मरीजों को निरंतर ऑक्सीजन मिल सके इसके लिए अस्पताल में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट 2 माह में स्थापित किया जाना अनिवार्य है।

चिकित्साकर्मियों व मेडिकल स्टाफ का बढ़ाएं मनोबल

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पिछले 13-14 महीनों से प्रदेश का चिकित्साकर्मी, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ युद्ध स्तर पर अपनी जाम जोखिम में डालकर बिना रुके आमजन की सेवा कर रहा है। ऐसे में हमारा यह कर्त्तव्य बनता है कि उनकी हौसलाअफजाई करें। उनका मनोबल बना रहेगा तभी ये लड़ाई लड़ी जा सकेगी।

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