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भीषण गर्मी और कोविड के बाद आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि से राजस्थान में बिजली की खपत में वृद्धि और आपूर्ति बाधित

ऊर्जा मंत्री ने प्रदेश में बिजली की मांग एवं आपूर्ति की समीक्षा की

जयपुर। उर्जा मंत्री श्री भंवर सिंह भाटी की अध्यक्षता मेें बुधवार को यहां विद्युत भवन में आयोजित बैठक में प्रदेश में बिजली की मांग एवं उपलब्धता की समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में सामने आया कि अप्रैल माह में भीषण गर्मी और कोविड महामारी के बाद आर्थिक गतिविधियों मेें वृद्धि के चलते राजस्थान में बिजली की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष माह अप्रैल में बिजली की मांग में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साथ ही पीक डिमांड भी 22 प्रतिशत बढ़कर 14200 मेगावाट तक पहुंच गई है। इस माह बिजली की खपत 3000 लाख यूनिट प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच चुकी है।

प्रमुख शासन सचिव उर्जा एवं अध्यक्ष डिस्कॉम्स भास्कर ए. सावंत द्वारा बैठक में बिजली की उपलब्धता एवं मांग व आपूर्ति की स्थिति के बारे में उर्जा मंत्री को विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राष्ट्रव्यापी घरेलू कोयले के संकट एवं आयातित कोयले की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के चलते विद्युत की उपलब्धता में कमी आई है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार 173 कोयला आधारित विद्युत गृहों में से 8 बंद हैं। देश के 98 कोयला आधारित विद्युत गृहों में कोयला भंडारण निर्धारित मात्रा का 25 प्रतिशत से भी कम है एवं यह सभी विद्युत गृह कोयला भंडारण के हिसाब से क्रिटिकल लेवल पर है। निर्धारित कोयला भंडारण मात्रा का राजस्थान एवं मध्यप्रदेश में 13 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 14 प्रतिशत, उत्तरप्रदेश में 19 प्रतिशत, गुजरात में 23 प्रतिशत, पंजाब में 28 प्रतिशत एवं हरियाणा में 35 प्रतिशत उपलब्ध है।

इन सभी राज्यों में विद्युत की उपलब्धता में कमी एवं खपत में वृद्धि में आए अप्रत्याशित अंतर के चलते बिजली की आपूर्ति बाधित हुई है। राजस्थान राज्य भी इससे पृथक नहीं है, बल्कि राजस्थान में 35 प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि के चलते बिजली की आपूर्ति बाधित हुई है। मांग एवं आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए मजबूरीवश ग्रामीण क्षेत्रों एवं कस्बों में बिजली की आपूर्ति में कटौती की जा रही है। पूर्व में यह कटौती ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित थी, ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए नगरीय क्षेत्रों में भी कटौती गत दो-तीन दिनों से की गई है। वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन लगभग 480 लाख यूनिट बिजली की कमी है अर्थात् दिन के 24 घंटों में 15-15 मिनट के ब्लॉक्स में यह कमी 500 मेगावाट से 3000 मेगावाट के मध्य रहती है।

बिजली की मांग एवं उपलब्धता के चलते पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश इत्यादि राज्यों में भी बिजली की कमी 30 से 40 प्रतिशत है। इसके मध्यनजर गुजरात में सप्ताह में एक दिन औद्योगिक अवकाश आवश्यक किया है।

विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार से 756 मेगावाट एन.टी.पी.सी., दादरी प्लांट से आवंटन हेतु आवेदन किया गया एवं राज्य को 179 मेगावाट का आवंटन हुआ एवं आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है। इसी क्रम में अडानी पावर से अतिरिक्त 40 मेगावाट एवं सी.जी.पी.एल. से 380 मेगावाट विद्युत आपूर्ति हेतु प्रक्रिया अमल में लाई गई है एवं शीघ्र ही इसकी आपूर्ति की संभावना है।

गत शनिवार को विद्युत निगमों के प्रबंध निदेशकों से चर्चा कर नगरीय क्षेत्रों में विद्युत कटौती आवश्यक सेवाओं को छोड़कर प्रारंभ की गई। तदुपरांत रविवार को भार आंकलन एवं विद्युत की आपूर्ति एवं कटौती पर चर्चा कर निर्णय लिया गया कि विद्युत कटौती की पूर्व सूचना फील्ड अधिकारियों को मुहैया कराई जाए जिस पर कार्यवाही जारी है। आगामी दो से तीन दिनों में इस पर पूर्ण रूप से अमल संभव हो सकेगा।

पावर एक्सचेंज से बिजली के क्रय विक्रय हेतु केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग द्वारा अधिकतम कीमत 12 रुपए प्रति यूनिट निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक 15 मिनट के ब्लॉक हेतु बिजली की कीमत अलग-अलग होती है।एक्सचेंज से बिजली खरीदने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, परंतु उपलब्धता न होने के चलते खरीद नहीं हो पा रही है। कल दिनांक 26 अप्रेल को सांय 7 से 10 बजे के मध्य अधिकतम कीमत 12 रू. प्रति यूनिट की दर पर भी 1000 मेगावाट की बिड पर मात्र 4 मेगावाट से 34 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध हो सकी थी।

बैठक में लिए यह निर्णय
आवश्यक सेवाओं जैसे-अस्पताल, ऑक्सीजन सेंटर, पेयजल आपूर्ति व मिलिट्री इंस्टालेशन आदि को बिजली कटौती से पूर्णतया मुक्त रखा जाएगा। संभागीय मुख्यालयों पर एक घंटा, जिला मुख्यालयों पर दो घंटे, नगरपालिका क्षेत्रों एवं 5 हजार से अधिक आबादी वाले कस्बों में 3 घंटे विद्युत कटौती करने का निर्णय लिया गया है। जयपुर, जोधपुर, अजमेर संभागीय मुख्यालयों पर प्रातः 7 बजे से 8 बजे तक एवं कोटा, भरतपुर, बीकानेर एवं उदयपुर संभाग मुख्यालयों पर प्रातः 8 से 9 बजे तक कटौती की जाएगी। इसी तरह जिला मुख्यालयों पर प्रातः 6.30 बजे से 8.30 बजे तक एवं नगर पालिका क्षेत्रों एवं 5 हजार से अधिक आबादी वाले कस्बों में प्रातः 6 बजे से 9 बजे तक बिजली कटौती का समय निर्धारित किया गया है। यथासंभव प्रातः (6 बजे से 12 बजे) चलने वाले सभी कृषि आपूर्ति ब्लॉकों को रात्रि में शिफ्ट किया जाएगा।

कृषि आपूर्ति ब्लॉक के समय को 6 घंटे से घटाकर 5 घंटा किया जाएगा। सभी औद्योगिक उपभोक्ताओं को सांय 6 बजे से 10 बजे तक अपने विद्युत उपभोग को 50 प्रतिशत तक सीमित करने के निर्देश दिए गए। जहां कटौती करना प्रस्तावित है उसकी सूचना यथासंभव सभी उपभोक्ताओं को पूर्व में दी जाएगी।

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