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राजस्थानः मुख्यमंत्री ने दिये 13 जिलों में लागू नाइट कर्फ्यू हटाने के निर्देश

जयपुर

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले कुछ समय से कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार कमी को देखते हुए प्रदेश के 13 जिला मुख्यालयों में लागू रात्रिकालीन कर्फ्यू और शाम 7 बजे बाजार बंद करने के प्रतिबंध को हटाने के निर्देश दिए हैं। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक आयोजनों के लिए जिला कलेक्टर की पूर्वानुमति की अनिवार्यता के नियम में शिथिलता देते हुए अनुमति के स्थान पर सूचना देना जरूरी किया है। हालांकि इन आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों की अधिकतम संख्या पूर्व की भांति रहेगी।

गहलोत ने सोमवार, 18 जनवरी को अपने निवास स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंस से कोविड-19 संक्रमण की स्थिति और टीकाकरण की समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना के मामलों में गिरावट के बावजूद हमें मास्क पहनने, दो गज दूरी बनाये रखने, भीड़-भाड़ से दूर रहने के कोविड प्रोटोकॉल की पालना में कोई ढि़लाई नहीं बरतनी है। ऐसी नौबत न आये कि सरकार को फिर से प्रतिबंध लगाने पर मजबूर होना पड़े। इस दौरान उन्होंने निजी अस्पतालों एवं लैब्स में आरटी-पीसीआर जांच की दर 800 रुपये से घटाकर 500 रुपये करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से प्रदेशवासियों को कम दरों पर जांच सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

गहलोत ने कहा कि बेहतरीन प्रबंधन से राजस्थान में कोरोना की स्थिति काफी नियंत्रण में है। प्रदेश की कोरोना से मुक्त होने की दर राष्ट्रीय औसत 96.58 के मुकाबले 97.53 प्रतिशत है। एक्टिव मामलों की संख्या भी लगातार घट रही है। कई जिलों में पॉजिटिव मामले शून्य तक आ गये हैं। ऐसे में रात्रिकालीन कर्फ्यू तथा बाजार खुलने के समय पर लगी पाबंदी हटाई गई है। अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए निजी अस्पतालों में बेड्स की उपलब्धता सुनिश्चित हो, इसके लिए 100 बेड से अधिक क्षमता वाले निजी अस्पतालों में कोविड के लिए आरक्षित बेड की संख्या 40 प्रतिशत से घटाकर न्यूनतम 10 बेड करने के निर्देश दिये गये हैं।

पहले दिन 73.79 प्रतिशत हैल्थ वर्कर्स को टीका लगना उत्साहजनक

गहलोत ने प्रदेश में कोविड-19 के वैक्सीनेशन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान कहा कि प्रदेश में पहले ही दिन शनिवार को राष्ट्रीय औसत 63.66 प्रतिशत से करीब 10 प्रतिशत अधिक कुल 73.79 प्रतिशत हैल्थ वर्कर्स द्वारा वैक्सीन लगवाया जाना उत्साहजनक है और यह इस बात का संकेत है कि कोरोना प्रबंधन की तरह ही हम टीकाकरण में भी अव्वल रहेंगे।

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