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वेतन के बराबर तो काम कर लो

जयपुर

सीएमडी ने रोडवेज कर्मचारियों को दिया संदेश

जयपुर। कई दशकों से राजस्थान रोडवेज घाटे में चल रही है। लगातार घाटे में चलने और सुधार की गुंजाइश नहीं दिखाई देने के कारण अब सरकारें भी रोडवेज को पैसा देने में कतराने लगी है। कर्मचारियों और अधिकारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार, कामचोरी बढ़ती ही जा रही है और घाटा भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अब रोडवेज सीएमडी को भी अधिकारियों-कर्मचारियों को संदेश देना पड़ गया है कि वह अपने वेतन के बराबर तो काम कर लें, ताकि स्थिति में कुछ सुधार हो सके।

रोडवेज के प्रबंध निदेशक नवीन जैन ने प्रबंधकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कहा कि डीजल औसत के संबंध में भविष्य में डिपो स्तर पर डीजल औसत की समीक्षा करने के स्थान पर बस व चालक के स्तर पर डीजल औसत की समीक्षा की जाए। चालक बस चलाता है, तब रोडवेज को राजस्व प्राप्त होता है, जिससे वेतन आदि का भुगतान किया जाता है। रोडवेज कर्मियों को कम से कम वेतन के बराबर कार्य करना चाहिए।

एबीसीडी अभियान के तहत कार्यशालाओं में किए जा रहे कार्यों के संबंध में निर्देश दिया कि बसों में सिर्फ मेकअप या डेंटिंग-पेंटिंग पर ध्यान देने के साथ ही बस के इंजन व अन्य तकनीक संबंधी कमियों को दूर किया जाए। कार्यशालओं में कर्मियों को विभिन्न ट्रेड्स की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी कहा गया कि आगारों के लेखा, यांत्रिक, प्रशासन और यातायात विभाग के अधिकारियों द्वारा पहले अपना कार्य सुचारू रूप से नहीं करने के कारण ही आज कार्य का दबाव महसूस हो रहा है।

जुलाई के दूसरे सप्ताह में ड्यूटी का पुराना ढर्रा बदलने की कवायद और नवाचार के तौर पर समय-पालक व्यवस्था लागू की गई, उसी प्रकार जल्द ही सहायक यातायात निरीक्षक की ड्यूटी में भी परिवर्तन देखने को मिलेगा। इसके साथ ही आगार के प्रबंधक संचालन को अधीनस्त कर्मचारियों को काम का सही तरह से बंटवारा करने के भी निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि रोडवेज के एबीसीडी कार्यक्रम के तहत बसों के तकनीकी रख-रखाव के साथ बसों की डेंटिंग-पेंटिंग, विंडो लॉक, सीट कवर आदि का कार्य करने के लिए जुलाई में 500, अगस्त में 300 और सितंबर में 200 बसों का टारगेट दिया गया है, जिससे यात्रियों को अच्छी कंडीशन में बस उपलब्ध हो सके।

रोडवेज के जानकारों का कहना है कि कॉन्फ्रेंस में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उन सभी मुद्दों के कारण ही रोडवेज दशकों से घाटे में चल रही है। अभी तक इनपर कठोर कदम नहीं उठाए गए थे। अब हर तरफ से हताश होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना पड़ रहा है। यदि इन मामलों में कठोरता से कदम उठाए गए, तो रोडवेज की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है।

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