जगदीप धनखड़ बने 14वें उपराष्ट्रपति, भैरोंसिंह शेखावत के बाद राजस्थान से दूसरे उपराष्ट्रपति बने

जयपुर

मार्गरेट अल्वा पर 527 वाटों से बड़ी जीत हासिल की

जयपुर। राजस्थान के जगदीप धनखड़ देश के 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने विपक्षी दलों की प्रत्याशी मार्गरेट अल्वा पर 527 वोटों से जीत दर्ज की। अल्वा को 182 वोट ही मिल पाए। झुंझुनूं जिले के चिड़ावा के एक छोटे से गांव किठाना में एक किसान परिवार में जन्में जगदीप धनखड़ राजस्थान से उपराष्ट्रपति के पद तक पहुंचने वाली दूसरी बड़ी शख्सियत हैं। इससे पूर्व भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक भैरोंसिंह शेखावत उपराष्ट्रपति के पद पर पहुंच चुके हैं।

जगदीप धनखड़ का जन्म राजस्थान राज्य के झुंझुनूं जिले के एक छोटे से गांव किठाना में हुआ था। धनखड़ ने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौडग़ढ़ से पूरी की और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद वे वकालत करने लगे। राजस्थान हाईकोर्ट में वर्षों तक वकालत की तथा 1986 में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। धनखड़ नौंवीं लोकसभा (1989 से 1991) के लिए राजस्थान में झुंझुनू संसदीय सीट से जनता दल उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे।

उसी दौरान कुछ समय के लिए धनखड़ वी.पी. सिंह गठबंधन सरकार में संसदीय कार्य मंत्रालय में उप मंत्री बने। इसके बाद धनखड़ ने 1991 में जनता दल छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले ली। धनखड़ ने 1991 में कांग्रेस के टिकट पर अजमेर से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा के रासासिंह रावत से हार गए, लेकिन फिर 1993 में जगदीप धनखड़ राजस्थान विधानसभा चुनाव में अजमेर जिले की किशनगढ़ विधानसभा चुनाव से कांग्रेस टिकट पर लड़ कर विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के जगजीतसिंह को एक हजार नौ सौ 58 वोटों से हराया था। 1998 में वे झुंझुनू से कांग्रेस टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ कर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2003 में उन्होंने वसुंधरा राजे के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने पर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। राजस्थान के जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण दिलाने में धनखड़ की विशेष भूमिका रही थी।

उल्लेखनीय है कि जगदीप धनखड़ इससे पूर्व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे और उनके सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ संबंध काफी खराब रहे थे। टीएमसी उनपर भाजपा के एजेंट के रूप में काम करने के आरोप लगाती रही है।

मार्गरेट अल्वा पर 527 वाटों से बड़ी जीत हासिल की

जयपुर। राजस्थान के जगदीप धनखड़ देश के 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने विपक्षी दलों की प्रत्याशी मार्गरेट अल्वा पर 527 वोटों से जीत दर्ज की। अल्वा को 182 वोट ही मिल पाए। झुंझुनूं जिले के चिड़ावा के एक छोटे से गांव किठाना में एक किसान परिवार में जन्में जगदीप धनखड़ राजस्थान से उपराष्ट्रपति के पद तक पहुंचने वाली दूसरी बड़ी शख्सियत हैं। इससे पूर्व भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक भैरोंसिंह शेखावत उपराष्ट्रपति के पद पर पहुंच चुके हैं।

जगदीप धनखड़ का जन्म राजस्थान राज्य के झुंझुनूं जिले के एक छोटे से गांव किठाना में हुआ था। धनखड़ ने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौडग़ढ़ से पूरी की और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद वे वकालत करने लगे। राजस्थान हाईकोर्ट में वर्षों तक वकालत की तथा 1986 में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। धनखड़ नौंवीं लोकसभा (1989 से 1991) के लिए राजस्थान में झुंझुनू संसदीय सीट से जनता दल उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे।

उसी दौरान कुछ समय के लिए धनखड़ वी.पी. सिंह गठबंधन सरकार में संसदीय कार्य मंत्रालय में उप मंत्री बने। इसके बाद धनखड़ ने 1991 में जनता दल छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले ली। धनखड़ ने 1991 में कांग्रेस के टिकट पर अजमेर से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा के रासासिंह रावत से हार गए, लेकिन फिर 1993 में जगदीप धनखड़ राजस्थान विधानसभा चुनाव में अजमेर जिले की किशनगढ़ विधानसभा चुनाव से कांग्रेस टिकट पर लड़ कर विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के जगजीतसिंह को एक हजार नौ सौ 58 वोटों से हराया था। 1998 में वे झुंझुनू से कांग्रेस टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ कर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2003 में उन्होंने वसुंधरा राजे के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने पर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। राजस्थान के जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण दिलाने में धनखड़ की विशेष भूमिका रही थी।

उल्लेखनीय है कि जगदीप धनखड़ इससे पूर्व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे और उनके सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ संबंध काफी खराब रहे थे। टीएमसी उनपर भाजपा के एजेंट के रूप में काम करने के आरोप लगाती रही है।

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