जोधपुरसम्मान

Rajasthan: राज्यपाल ने विश्वविख्यात बाँसुरीवादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया को प्रदान किया महाराजा हनवंतसिंह मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने विश्वविख्यात बाँसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया को महाराजा हनवंतसिंह मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने पंडित चौरसिया को सम्मानित करते हुए शाल, श्रीफल और एक लाख रुपए का चेक प्रदान कर पुरस्कृत किया। इस मौके पर मिश्र ने कहा कि कलाएं वह अनमोल धन हैं, जो हमारी इस धरा और जीवन को रस से सराबोर करती हैं। वे सोमवार 7 अगसत की शाम जोधपुर शहर में राई का बाग स्थित राजमाता कृष्णाकुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल में आयोजित मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट एवं स्वर सुधा, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में हिज हाईनेस महाराजा हनवंतसिंह मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह की अध्यक्षता राजस्थान पर्यटन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष गज सिंह ने की।
गज सिंह ने इस समारोह में सान्निध्य प्रदान करने पर राज्यपाल का आभार जताया और बताया कि इस पुरुस्कार की परंपरा रही है कि यह हमेशा राज्यपाल द्वारा ही प्रदान किया जाता रहा है। गज सिंह ने राज्यपाल को स्मृति चिह्न प्रदान किया।
इस अवसर पर पं. हरिप्रसाद चौरसिया की दो शिष्याओं देबोप्रिया एवं सुचिस्मिता चटर्जी एवं तबला संगतिकार आशीष रागवानी (मुम्बई) ने भाग लिया। राज्यपाल कलराज मिश्र ने महाराजा हनवंत सिंह के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि यह कितना सुखद है कि महाराजा हनवंत सिंह की याद की अक्षुण्ण रखने के लिए इस तरह का यह वार्षिक समारोह कलाओं समर्पित किया गया है।
’पं. चौरसिया देश की थाती’
राज्यपाल ने पं. हरिप्रसाद चौरसिया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के ख़ास पहलुओं की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को जिस तरह से उन्होंने अपनी बांसुरी से समृद्ध-संपन्न किया है, वह हमारे देश की थाती है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रख्यात बांसुरी वादक और संगीत मार्तण्ड पंडित हरि प्रसाद चौरसिया को बांसुरी वादक ही नहीं बल्कि बल्कि भारतीय संगीत की महान हस्ती बताते हुए कहा कि वे महान कलाकार हैं जिन्होंने हमारे संगीत के माधुर्य और पारम्परिक राग-संगीत की पुरातन विरासत को निरंतर संपन्न किया है। राज्यपाल ने कहा कि पं. चौरसिया को पुरस्कृत करते हुए वे अपने आपको सौभाग्यशाली अनुभव कर रहे हैं।
’प्रगतिशील क्रांतिकारी परिवर्तन के प्रणेता’
राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस अवसर पर महाराजा हनवंतसिंह का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने राजशाही के जमाने में लोकतंत्र को सुदृढ़ करने का कार्य किया और अद्भुत कर्मयोग का परिचय देते हुए अपार लोकप्रियता पाते हुए जन-जन के प्रिय बने। उन्हीं के शासनकाल में मारवाड़ी काश्तकारी व भू राजस्व अधिनियम को सबसे पहले प्रारम्भ करने का क्रांतिकारी, प्रगतिशील कार्य हुआ जिससे लाखों किसान एक ही दिन में अपने खेतों के स्थाई खातेदार बन गये।
राज्यपाल ने हनुवंतसिंह के संगीत प्रेम, भू राजस्व, लोकतंत्र के प्रति आस्था और योगदान तथा पोलो मैच के प्रति रुझान सहित कई विलक्षणताओं का स्मरण किया।
स्वर सुधा की अध्यक्ष चन्द्रा बूब एवं सचिव विवेक कल्ला, मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के प्रबन्धक श्री जगतसिंह आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के आरंभ में गज सिंह ने राज्यपाल तथा स्वर सुधा के सचिव विवेक कल्ला का स्वागत किया। पंडित हरिप्रसाद चौरसिया के सम्मान पत्र का पठन प्रियदर्शन ने किया तथा चंद्रा बूब ने पं.चौरसिया को सम्मान पत्र प्रस्तुत किया

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